Saturday, October 2, 2010

Kaise Bhulye ja sakenge ye Din- based on my college memories

कैसे भुलाये जा सकेंगे ये कालेज लाइफ के दिन,
जितना भी भूलना चाहेंगे उतना और याद आयेंगे ये दिन |
भले ही भूल जाये क्या थी pg और md ,
पर कैसे भूल पाएंगे रातभर जागकर उनकी शीटो को करना टोपो |
भले ही क्षीण पड़ जाएँगी दोस्तों कि यादें ,
पर कैसे भूल पाएंगे उनके साथ गुजरे वो क्षण और बातें |
कैसे भुलाई का सकेंगी वो चाय जी थडिया ,
जहाँ उठता था रोज एक नया मुद्दा ,
रहती थी नजरे आने -जाने वाले लोगो पर ,
और जहां वाणी को देते थे एक नया आयाम|
आखिर कैसे भूल पाएंगे होस्टल लाइफ के वो दिन ,
जब पढ़ते थे उपन्यास रात भर और खेलते थे ताश दोस्तों के साथ |
जब मनाते थे किसी का बर्थडे रात को,
और करते थे दूसरो को परेशान |
ये दिन हम कभी ना भुला पाएंगे ,
जितना भी भूलना चाहेंगे उतने और याद आयेंगे ये दिन |
कैसे भूल पाएंगे वो दिन जब जाते थे शादियों में बनकर फर्जी मेहमान,
कहते थे शादी को फर्जी , और करते थे अपना गुणगान |
ये कालेज के दिन भी कैसे निराले ,
चाहे रहती हो जेब में कडकी,
पर उधारी कि छत्रछाया में रहते है हमारे शौक नवाबी |

परीक्षायों के दिन आने पर हो जाता है यहाँ का मौसम बिलकुल बदला ,
हमारे छात्र चाय पीने का वक्त भी पढाई में लगाते है , और तो और किताबें भी कैंटीन और चाय कि थडिया पर लेकर जाते है |
अगर इनको कोई देखे तो यकीं नहीं कर सकता ,
मैंने पहले जो कहा उसमे थी थोड़ी भी सच्चाई |

कुछ भी कहो कालेज लाइफ के दिन है बड़े निराले ,
नहीं भुलाये जा सकेंगे ये दिन ,
जितना भी भूलना चाहेंगे उतना और याद आयेंगे ये दिन |

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