Saturday, October 2, 2010

ek bholi si ladki

एक भोली - भाली सी वो लड़की ,
कुछ अल्हड सी , कुछ नटखट सी वो लड़की ,
हर दुःख से अनजान सी लगती वो लड़की ,
चारों तरफ खुशिया बिखेरती वो लड़की ,
अपने भाई-बहनों से लडती- झगडती ,
कभी डांटने पर रूठ कर बैठ जाती ,
तो कभी दुलारने पर खिल सी जाती वो लड़की |
उमंगो से भरी व रोज नए सपने बुनने वाली वो लड़की ,
हर लड़की कि तरह अपने सपनों के राजकुमार का इंतजार करती वो लड़की |

बन जाएगी एक ही दिन में लड़की से औरत वो लड़की ,
हो जाएगी पराई एक ही दिन में अपने बाबुल से ,
दूर हो जाएगी उन सखियों से , जिनके साथ कभी खेली थी वो लड़की |
गुम हो जाएँगी उसकी शरारते , अल्हड़पन और हँसी ,
घिर जाएगी बहुत से बोझो तले |
महकाया था कभी जिसने जन्म लेकर अपने बाबुल का आँगन ,
अब फैलाएगी खुशियाँ अपने पिया के घर में |

एक भोली - भाली सी वो लड़की ,
कुछ अल्हड सी , कुछ नटखट सी वो लड़की.......................

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